दिनांक : 2026-08-06 00:13:00
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर संस्कृत के प्रचार-प्रसार और अनुसंधान को नई गति देने की दिशा में उत्तराखंड ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास में नेपाल के कार्यवाहक राजदूत महामहिम डॉ. सुरेन्द्र थापा से शिष्टाचार भेंट कर भारत और नेपाल के बीच संस्कृत, शोध, शैक्षणिक आदान-प्रदान तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में संस्कृत के बढ़ते वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान और विद्वत सहयोग को समय की आवश्यकता बताया गया।
नेपाल ने की उत्तराखंड की पहल की सराहना
बैठक के दौरान नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा ने संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नेपाल की संस्कृत विद्वत्ता और साहित्यिक परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है तथा भारत-नेपाल के बीच शैक्षणिक सहयोग से संस्कृत शिक्षा, अनुसंधान और शिक्षण पद्धतियों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय संस्कृत विद्वानों के मार्गदर्शन से नेपाल में संस्कृत अध्ययन को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त होगी।
संस्कृत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय पर जोर
संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह का मानना है कि संस्कृत सीखना अत्यंत सरल है। उन्होंने युवाओं के बीच संस्कृत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के समन्वय के महत्व पर विशेष बल दिया है, जिससे संस्कृत के शुद्ध उच्चारण और अध्ययन को अधिक सहज एवं प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि उत्तराखंड संस्कृत को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाए।
13 संस्कृत ग्राम और संस्कृत दिवस की तैयारियां
सचिव दीपक कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य के सभी 13 जनपदों में 13 संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं। आगामी 28 अगस्त 2026 को संस्कृत दिवस के अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम्, संस्कृत ग्रामों एवं विभिन्न गुरुकुलों में संगोष्ठियों, व्याख्यानों, कार्यशालाओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से आधुनिक समाज में संस्कृत की शाश्वत प्रासंगिकता को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा।
संयुक्त शोध और एमओयू से खुलेंगे नए अवसर
संस्कृत शिक्षा सचिव ने कहा कि जून 2025 में नेपाल में आयोजित 19वें विश्व संस्कृत सम्मेलन ने वैश्विक संस्कृत अध्ययन को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) संयुक्त अनुसंधान, शिक्षक एवं छात्र आदान-प्रदान, शैक्षणिक सहयोग तथा संस्कृत अध्ययन के संवर्धन के लिए नए अवसर उपलब्ध कराएगा।
उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल का संबंध संस्कृत, सनातन परंपराओं, दर्शन, साहित्य और साझा सांस्कृतिक विरासत पर आधारित एक अद्वितीय सभ्यतागत रिश्ता है, जिसे और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
बैठक में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज के संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य एवं वरिष्ठ संस्कृत पत्रकार डॉ. सुनील जोशी भी उपस्थित रहे। दोनों देशों के युवा शोधार्थियों एवं विद्वानों को संयुक्त शोध परियोजनाओं, शैक्षणिक आदान-प्रदान और संयुक्त प्रकाशनों के लिए प्रोत्साहित करने पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया, ताकि भारत-नेपाल के सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को नई मजबूती मिल सके।