दिनांक : 2026-09-19 22:59:00
नैनीताल। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पुलिस विभाग से पूछा है कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन क्यों नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि मुकदमा दर्ज होने के बाद उसे सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाए, ताकि पीड़ित पक्ष और उनके वकील आसानी से इसकी जानकारी हासिल कर सकें। हालांकि, उत्तराखंड में पोर्टल बंद कर शिकायतकर्ताओं को केवल ओटीपी के जरिए सूचना दी जा रही थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सीधा उल्लंघन बताया गया है।
हरिद्वार की ‘नेशनल पब्लिक ट्रस्ट’ द्वारा दायर जनहित याचिका में लंबे समय से बंद पड़े इस पोर्टल को दोबारा शुरू करने की मांग की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि यह पोर्टल जल्द सुचारू रूप से शुरू नहीं किया गया, तो आगामी सुनवाई की तारीख पर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना पड़ेगा।
उत्तराखंड पुलिस ने अदालत को बताया कि पुराने तकनीकी मुद्दों को सुलझा लिया गया है, अब आम लोग सिटीजन पोर्टल और ‘देवभूमि मोबाइल ऐप’ के जरिए एफआईआर डाउनलोड कर सकते हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने सबूत पेश किया कि उन्होंने सुबह ऐप में लॉग इन करने की कोशिश की, लेकिन वह काम नहीं कर रहा था।
नैनीताल हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 23 सितंबर को अदालत में एक तकनीकी विशेषज्ञ को पेश किया जाय, जो लाइव प्रदर्शित करके दिखाये कि यह एप्लीकेशन सही से काम कर रही है और एफआईआर डाउनलोड हो रही है।