मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से संवरा धुंगसरी गांव के गोविंद जोशी का भविष्य, डेयरी से हर माह कमा रहे 60 हजार

दिनांक : 2026-10-16 01:34:00

  • पौड़ी के धुंगसरी गांव में पशुपालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल, ₹10 लाख की सब्सिडी से कारोबार को मिला विस्तार

पौड़ी गढ़वाल। सरकारी योजनाओं का लाभ और मेहनत के साथ स्वरोजगार को अपनाकर ग्रामीण युवा अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। पौड़ी गढ़वाल के धुंगसरी गांव निवासी 37 वर्षीय गोविंद जोशी ने डेयरी फार्मिंग को आजीविका का आधार बनाकर यह साबित किया है। वर्ष 2017 में शुरू किए गए डेयरी व्यवसाय से आज वह प्रतिमाह करीब 60 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत मिली 10 लाख रुपये की सब्सिडी ने उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

पशुपालन के शौक को बनाया स्वरोजगार

गोविंद जोशी ने बताया कि उन्हें शुरू से ही पशुपालन में रुचि थी। इसी रुचि को रोजगार में बदलने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2017 में डेयरी व्यवसाय शुरू किया। अनुभव और निरंतर मेहनत के साथ उन्होंने कारोबार को आगे बढ़ाया। व्यवसाय के विस्तार के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लिया। योजना के तहत मिली 10 लाख रुपये की सब्सिडी से डेयरी को मजबूती मिली और आय के अवसर बढ़े।

गांव में रहकर आत्मनिर्भरता की राह

गोविंद जोशी की सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी फार्मिंग और पशुपालन की संभावनाओं को सामने लाती है। ऐसे व्यवसायों के माध्यम से युवा गांव में रहकर ही रोजगार विकसित कर सकते हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है।

स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही सरकार

प्रदेश सरकार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और पशुपालन जैसे व्यवसायों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के निर्देशन में युवाओं को स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

योजनाओं का लाभ लेकर बढ़ाएं आय – मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि पशुपालन और डेयरी फार्मिंग ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का बेहतर माध्यम हैं। पशुपालक विभागीय योजनाओं का लाभ लेकर अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं और आय के नए अवसर विकसित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से पशुपालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाने और विभागीय योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने की अपील की।

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