दिनांक : 2026-09-15 00:42:00
गोपेश्वर (चमोली)। मां नंदा भगवती की बड़ी जात अब अपने अंतिम पड़ावों की ओर बढ़ चली है। आला गांव से विदा होकर देव डोलियों, सैकड़ों छंतोलियों और हजारों श्रद्धालुओं का कारवां रविवार को नंदानगर के अंतिम गांव कनोल पहुंचा तो पूरा नंदा का मायका आस्था के रंग में रंग गया। मशकबीन, ढोल-दमाऊं और भंकरों की गूंज के बीच गूंजते मां नंदा के जयकारों ने हिमालयी घाटी को भक्तिमय कर दिया।
आला गांव से सुबह मां नंदा की डोलियों और छंतोलियों को ग्रामीणों ने लोकगीतों और जागरों के साथ भावुक विदाई दी। इसके बाद बड़ी जात जोखना और सितेल होते हुए कनोल पहुंची। पूरे रास्ते जगह-जगह ग्रामीणों ने डोलियों और छंतोलियों का स्वागत किया। जोखना और सितेल में हुए भव्य स्वागत के बाद कनोल में भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
कनोल पहुंचते ही ग्रामीणों ने फूलों की वर्षा और पारंपरिक तरीके से बड़ी जात का स्वागत किया। दोपहर बाद मां नंदा की देव डोलियां और सैकड़ों छंतोलियां एक-एक कर मां भगवती के चैक में पहुंचती रहीं। बंड नंदा डोली, कुरुड़-दशोली की नंदा डोली सहित अन्य देव डोलियों और छंतोलियों ने बड़ी जात की भव्यता में चार चांद लगा दिए। बड़ी जात के साथ तीन चैसिंघा खाड़ू भी कैलाश की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।
रातभर गूंजते रहे जागर और लोकगीत
बारिश के बावजूद नंदा के मायके में आस्था का उत्साह कम नहीं हुआ। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने रातभर मां नंदा के लोकगीत और जागर गाए। गांवों में जगह-जगह अतिथि सत्कार के लिए ग्रामीण जुटे रहे। बिना किसी राजकीय मदद के ग्रामीण हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी और ठहरने की व्यवस्था कर रहे हैं। आला गांव में मिले आत्मीय आतिथ्य से श्रद्धालु बेहद भावुक और प्रसन्न नजर आए।
रामणी के बाद बढ़ता गया कारवां
रामणी गांव के बाद बड़ी जात में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। रामणी से आला, फिर जोखना और सितेल तक पहुंचते-पहुंचते हजारों श्रद्धालु बड़ी जात में शामिल हो गए। अब प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं का रेला नंदा की डोलियों के साथ कैलाश की ओर बढ़ रहा है।
हजारों लोगों का यह अभूतपूर्व जुटान मां नंदा के प्रति पहाड़ की गहरी आस्था, विश्वास और समर्पण का जीवंत प्रमाण बन गया है। नंदा की विदाई के इन पलों में पूरा मायका जैसे अपनी ध्याणी को कैलाश के लिए विदा करने उमड़ पड़ा है।