उत्तराखण्ड : भटवाड़ी गांव की शादी बनी सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उदहारण

दिनांक : 2026-09-22 00:27:00

रुद्रप्रयाग : उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले में एक शादी पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का बड़ा संदेश लेकर सामने आई है। रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि ब्लॉक स्थित भटवाड़ी गांव के शिक्षक सतेंद्र भंडारी ने अपनी बेटी के विवाह समारोह को पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त रखने का संकल्प लिया है। इस समारोह में डिस्पोजल या प्लास्टिक के बर्तनों का पूरी तरह परित्याग कर, पारंपरिक रूप से मालू के पत्तों से तैयार किए गए दोने-पत्तलों में अतिथियों को भोजन परोसा जाएगा।

पहाड़ों की पहचान रही यह प्राचीन परंपरा बदलते दौर और आधुनिक प्लास्टिक बर्तनों के बढ़ते चलन के कारण लगभग लुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी थी। ऐसे में एक शादी के बहाने इस पुरानी परंपरा को फिर से जीवंत करने की कोशिश न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और पहाड़ी संस्कृति से जोड़ने का भी काम कर रही है।

इस पहल के चलते गांव में पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक संवाद भी लौट आया है। बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष जंगलों से लाए गए मालू के पत्तों को चुनने, उन्हें आकार देने और सिलने की पारंपरिक कला नई पीढ़ी के बच्चों को सिखा रहे हैं। बच्चे भी उत्साह के साथ इस काम को सीख रहे हैं और अपने बुजुर्गों के अनुभव से पहाड़ की इस पुरानी परंपरा से परिचित हो रहे हैं।

बिना किसी मशीन या कारखाने के, केवल हाथ के हुनर और वर्षों के अनुभव से दोने-पत्तल तैयार किए जा रहे हैं। यह प्रयास दिखाता है कि हमारी पारंपरिक जीवनशैली में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता पहले से ही मौजूद रही है। जरूरत सिर्फ उन परंपराओं को समझने, सहेजने और आज के दौर में फिर से अपनाने की है।

सतेंद्र भंडारी की यह पहल एक पारिवारिक आयोजन को सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश से जोड़ने की सुंदर मिसाल बन रही है। शादी जैसे उत्सव में प्लास्टिक से दूरी बनाकर प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय परंपराओं को महत्व देना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।

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