दिनांक : 2026-09-10 22:14:00
संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि निवेश बढ़ाने के नाम पर सरकारी विभागों की जमीनों को होटल, रिसॉर्ट, स्पा एवं वेलनेस सेंटर, आवासीय कॉलोनियों और अन्य व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने करीब 7000 बीघा सरकारी जमीन से जुड़े प्रस्तावों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते हुए सरकार से पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक कितनी सरकारी जमीन किस विभाग की ओर से किस संस्था या व्यक्ति को, किस उद्देश्य और किन शर्तों पर दी गई है। इसके लिए सरकारी जमीनों के आवंटन, बिक्री, नीलामी और लीज का श्वेतपत्र जारी करने की मांग की गई।
उन्होंने कहा कि जिन टेंडर और नीलामी प्रक्रियाओं के जरिए जमीन उपलब्ध कराई जा रही है, उनमें आर्थिक और पात्रता संबंधी शर्तें इतनी बड़ी हैं कि सामान्य उत्तराखंडी उद्यमी और स्थानीय कारोबारी उनके सामने टिक नहीं सकते। आरोप लगाया कि ऐसी नीतियों का फायदा स्थानीय लोगों की बजाय बड़े कॉरपोरेट समूहों और पूंजीपतियों को अधिक मिल सकता है।
संगठनों ने मांग की कि निवेश नीति में स्थानीय युवाओं, उद्यमियों, महिला समूहों, सहकारी संस्थाओं और छोटे एवं मध्यम कारोबारियों को प्राथमिकता दी जाए। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की जमीन केवल निवेश का संसाधन नहीं, बल्कि यहां के लोगों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों की संपत्ति है।
उन्होंने सरकार से यूआईआईडीबी के माध्यम से सरकारी जमीन से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को सार्वजनिक करने, प्रस्तावित नीलामी और लीज पर रोक लगाने तथा पूर्व में किए गए जमीन आवंटन और लीज की भी पारदर्शी समीक्षा करने की मांग की।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को देहरादून तक सीमित नहीं रखा जाएगा। विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जन संगठनों को साथ लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उत्तराखंड की जनता पहले भी संघर्ष करती रही है और जरूरत पड़ी तो फिर सड़कों पर उतरेगी।
ज्ञापन देने वालों में कमला पंत, मोहित डिमरी, निर्मला बिष्ट, अनिल डोभाल, विमला कोली, मंजू बलोदी, विजया नैथानी, आशीष नौटियाल, नंद किशोर नौटियाल, अमित परमार, अंबुज शर्मा और मुरली सिंह रावत सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और जन संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।