बाइक का लाइसेंस दिखाकर स्कूटी चलाना पड़ेगा महंगा, उत्तराखण्ड में नया नियम लागू

दिनांक : 2026-08-20 18:55:00

देहरादून : उत्तराखण्ड में वाहन चालकों और वाहन स्वामियों से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। मोटरयान अधिनियम के तहत किए गए संशोधनों के बाद अब ड्राइविंग लाइसेंस की श्रेणी, लाइसेंस की वैधता और वाहन बीमा से जुड़े प्रावधान पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और सख्त किए गए हैं। वहीं, कुछ मामलों में सजा के प्रावधानों को सरल करते हुए आर्थिक दंड में बढ़ोतरी की गई है।

गियर और बिना गियर वाले दोपहिया वाहनों के लिए अलग श्रेणी

नए प्रावधानों में ड्राइविंग लाइसेंस की श्रेणियों को लेकर विशेष ध्यान दिया गया है। गियर वाली मोटरसाइकिल के लिए जारी लाइसेंस के आधार पर बिना गियर वाले दोपहिया वाहन, जैसे स्कूटी और इसी श्रेणी के अन्य वाहन चलाने की अनुमति को अलग श्रेणी के तौर पर देखा गया है।

ऐसे में जिन वाहन चालकों के पास पहले से गियर वाली मोटरसाइकिल का लाइसेंस है, उन्हें अपने लाइसेंस में बिना गियर वाले दोपहिया वाहन की श्रेणी का उल्लेख भी कराना होगा। यानी स्कूटी चलाने के लिए संबंधित श्रेणी का लाइसेंस होना जरूरी होगा।

लाइसेंस की अवधि खत्म होने के बाद भी 30 दिन की अवधि

लाइसेंस से जुड़ा एक अहम बदलाव इसकी वैधता समाप्त होने के बाद की अवधि को लेकर है। नए प्रावधान के अनुसार लाइसेंस की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी उसे 30 दिनों तक वैध माना जाएगा।

इस अवधि के भीतर लाइसेंस धारक को उसका नवीनीकरण करा लेना होगा। इससे वाहन चालकों को लाइसेंस रिन्यू कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा, लेकिन 30 दिन की अवधि के बाद नियमों का पालन करना जरूरी होगा।

राज्य में कहीं से भी कराया जा सकेगा वाहन का रजिस्ट्रेशन

मोटरयान अधिनियम में किए गए संशोधन के तहत वाहन पंजीकरण को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब कोई व्यक्ति पूरे उत्तराखंड में किसी भी स्थान से अपने वाहन का रजिस्ट्रेशन करा सकता है। इससे वाहन स्वामियों को पंजीकरण के लिए किसी एक निर्धारित क्षेत्र तक सीमित रहने की बाध्यता से राहत मिलेगी।

बिना बीमा वाहन चलाना पड़ेगा महंगा

वाहन बीमा को लेकर नए नियमों में आर्थिक दंड को काफी सख्त किया गया है। बिना वैध बीमा के वाहन चलाते हुए पकड़े जाने पर अब वाहन स्वामी को भारी जुर्माना देना पड़ सकता है।

पहली बार बिना बीमा वाहन पकड़े जाने पर बेस प्रीमियम का तीन गुना या ₹5,000, इनमें से जो राशि अधिक होगी, वह वसूल की जाएगी।

वहीं, दूसरी बार बिना बीमा वाहन पकड़े जाने पर बेस प्रीमियम का पांच गुना या ₹10,000, जो भी अधिक हो, आर्थिक दंड के रूप में वसूला जाएगा।

जेल का प्रावधान हटाया गया

नए संशोधन में बिना बीमा वाहन चलाने के मामले में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। ऐसे मामले में जेल की सजा के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है और इसके स्थान पर आर्थिक दंड पर जोर दिया गया है।

जन विश्वास अधिनियम के बाद बदला दंड का स्वरूप

उत्तराखण्ड में पूरे देश की तरह जन विश्वास अधिनियम लागू होने के बाद मोटरयान अधिनियम के तहत कई दंडात्मक प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य कुछ प्रावधानों को सरल बनाना और नियमों के उल्लंघन पर आर्थिक दंड को प्रभावी बनाना है।

इस बदलाव के बाद वाहन चालकों के लिए जरूरी है कि वे अपने ड्राइविंग लाइसेंस की श्रेणी, उसकी वैधता और वाहन के बीमा की स्थिति की समय-समय पर जांच करते रहें। खास तौर पर स्कूटी या बिना गियर वाले दोपहिया वाहन चलाने वाले लोगों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके लाइसेंस में संबंधित श्रेणी दर्ज है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *