SDSU के पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर में पंचम विज्ञान संचारक सम्मान–2026 का भव्य आयोजन, महिला वैज्ञानिकों के योगदान को मिला राज्य-राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान

दिनांक : 2026-02-15 00:22:00

ऋषिकेश : पंचम विज्ञान संचारक सम्मान – 2026 का आयोजन आज 14 फरवरी 2026 को मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी विभाग, पं. ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में किया गया। यह प्रतिष्ठित कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया, जिसका उद्देश्य महिला वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों, चिकित्सकों तथा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करना और विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मानित करना है। यह आयोजन सोसाइटी ऑफ पॉल्यूशन एंड एनवायरनमेंटल कंजर्वेशन साइंटिस्ट्स (SPECS), देहरादून द्वारा कुसुम कांत फाउंडेशन, सनराइज एकेडमी, मंथन वेलफेयर सोसाइटी, ग्रासरूट अवेयरनेस एंड टेक्निकल इंस्टीट्यूट फॉर सोसाइटी, उत्तरांचल विश्वविद्यालय, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, स्मार्ट सर्किट्स, स्पीकिंग क्यूब तथा द देहरादून डायलॉग के सहयोग से किया गया ।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह ने सभी पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि विज्ञान संचार, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विशिष्ट प्रतिभाओं को सम्मानित किया, भारत की अनेक समकालीन महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि किस प्रकार महिलाओं ने शोध, अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा, जैव प्रौद्योगिकी, अभियंत्रण और नवाचार के क्षेत्रों में उल्लेखनीय पहचान बनाई है, जो कि काबिले तारीफ है।

अमेरिका से आये प्रो संजय मल्होत्रा की सभी आयोजको व पुरस्कार प्राप्तकर्ता को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए भविष्य में विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने के लिए प्रेरित किया।

पुरस्कार समिति की अध्यक्ष मोना बाली ने कहा कि “पंचम विज्ञान संचारक सम्मान–2026 के अवसर पर, जो ‘अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस’ के साथ ‘From Vision to Impact: Redefining STEM by Closing the Gender Gap’ विषय के अंतर्गत आयोजित किया गया है, आप सभी को हार्दिक बधाई देते हुए मुझे अत्यंत गर्व और सम्मान का अनुभव हो रहा है। विज्ञान के क्षेत्र में आपका समर्पण और परिवर्तनकारी योगदान विश्वभर की महिलाओं के लिए प्रेरणा और गौरव का विषय है।आप STEM की सच्ची दूत हैं, जो बाधाओं को तोड़ते हुए नवाचार को प्रोत्साहित करती हैं ।

डॉ. पारुल सिंघल ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में महिलाओं की भूमिका पर अपने व्याख्यान में ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से लेकर समकालीन उपलब्धियों तक विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। डॉ संतोष एम्स ऋषिकेश ने विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में महिलाओं के अमूल्य योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इतिहास साक्षी है – महिलाओं ने ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की हर धारा को समृद्ध किया है। उन्होंने बताया कि शिक्षा, अंतरिक्ष, चिकित्सा, अभियांत्रिकी और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में महिलाओं ने न केवल सहभागिता बढ़ाई है, बल्कि नेतृत्व की नई मिसालें भी स्थापित की हैं।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन पूजा पोखरियाल द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिन्होंने सभी अतिथियों, सम्मानित प्रतिभागियों, सहयोगी संस्थाओं एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन सफिया हसन द्वारा प्रभावपूर्ण एवं गरिमामय शैली में किया गया। इस अवसर पर डॉ. जी.के. ढींगरा हरि राज सिंह, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. अनीता गेहलोत, नीरज उनियाल तथा बलेंदु जोशी सहित अनेक विशिष्ट अतिथि, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।

अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

  • प्रो. शिवानी कुमार : नाइट कैंसर इंस्टीट्यूट, ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी (USA) की निदेशक एवं वैश्विक ख्याति प्राप्त ऑन्कोलॉजिस्ट प्रो. शिवानी कुमार प्रारंभिक चरण के कैंसर क्लिनिकल ट्रायल्स की अग्रणी विशेषज्ञ हैं।

राष्ट्रीय पुरस्कार

  • डॉ. धनलक्ष्मी सिवानंधन : प्रख्यात कैंसर वैज्ञानिक एवं ड्रग डिस्कवरी विशेषज्ञ डॉ. धनलक्ष्मी सिवानंधन ने लक्ष्य पहचान से लेकर क्लिनिकल ट्रायल तक अनेक ऑन्कोलॉजी कार्यक्रमों का सफल नेतृत्व किया है।

राज्य पुरस्कार

  • प्रो. नमिता जोशी : तीन दशकों से अधिक के शैक्षणिक अनुभव के साथ प्रो. नमिता जोशी ने पर्यावरण विज्ञान और प्राणीशास्त्र के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
  • डॉ. बेला गोयल : स्वर्ण पदक विजेता एवं क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्री विशेषज्ञ डॉ. बेला गोयल, एम्स ऋषिकेश में अतिरिक्त प्रोफेसर एवं एसोसिएट डीन (रिसर्च) के रूप में कार्यरत हैं।
  • डॉ. ज्योत्स्ना सेठ : प्रख्यात प्रोस्थोडॉन्टिस्ट एवं शिक्षाविद् डॉ. ज्योत्स्ना सेठ ने 100 से अधिक शोध प्रकाशनों और अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से दंत शिक्षा एवं अनुसंधान को समृद्ध किया है।
  • डॉ. मनु पंत : ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मनु पंत पादप जैव प्रौद्योगिकी और जैव विविधता संरक्षण की अग्रणी शोधकर्ता हैं।
  • डॉ. तृप्ति मलिक : 20 वर्षों से अधिक अनुभव वाली सूक्ष्मजैविकी विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति मलिक एंटीमाइक्रोबियल शोध और माइक्रोबियल बायोटेक्नोलॉजी में सक्रिय हैं।
  • डॉ. गीता राणा : प्रबंधन क्षेत्र की विशिष्ट विदुषी डॉ. गीता राणा ने 63 शोधपत्र, 7 पुस्तकें और अनेक पेटेंट के माध्यम से अकादमिक उत्कृष्टता स्थापित की है।
  • डॉ. प्रभा लामा : अंग्रेजी साहित्य की प्रख्यात विदुषी एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रभा लामा 18 वर्षों से शिक्षण और शोध में सक्रिय हैं।

युवा वैज्ञानिक पुरस्कार

  • डॉ. पूनम चाहल : आईआईटी रुड़की में पोस्टडॉक्टरल फेलो डॉ. पूनम चाहल क्वाटरनरी भूविज्ञान और हिमालयी भू-आकृतिक विकास की विशेषज्ञ हैं।
  • डॉ. ईशा आहुजा बत्रा : क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं ‘अवलोकन’ की संस्थापक डॉ. ईशा बत्रा वैज्ञानिक, सुलभ और सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पक्षधर हैं।

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